what is cybercrime in hindi :साइबर अपराध के बारे में हिंदी में जाने

 

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Hello dosto ,आज आप मेरी इस पोस्ट में जानेंगे की what is cyber crime in hindi ?आप सभी कंप्यूटर तो चलाते ही है तो  आपने कभी न कभी  हैकिंग ,email-स्पैम ,वायरस जैसी समस्याओ  का सामना किया होगा |अगर नही किया तो बहुत अच्छी  बात है |ये सभी साइबर क्राइम के अंतर्गत आते है और हर वो शक्स जो कंप्यूटर इन्टरनेट चलाता है उसे इसके बारे में जानकरी होनी चाहिए तभी आप इन सभी खतरों से पहले से सावधान रह सकते है | तो आज की मेरी पोस्ट की जानकारी साइबर क्राइम पर ही है |इस पोस्ट को आप पूरा पढ़े और जानकारी हासिल करे |

 

साइबर अपराध क्या है ?(what is cyber crime in hindi) ?

 

what is cyber crime in hindi

यह एक ऐसा अपराध है जो किसी व्यक्ति द्वारा कंप्यूटर और नेटवर्क की सहायता से किया जाता है |                  

कंप्यूटर , इन्टरनेट ,सॉफ्टवेर आदि तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए  किसी  दुसरे व्यक्ति ,कंपनी ,बैंक आदि को  किसी भी तरह का नुकसान पंहुचाना साइबर क्राइम या साइबर अपराध  कहलाता है |

यानी यहाँ पर अपराध करने के लिए हथियार कोई बंदूक, चाक़ू या बम नही होता है बल्कि यह हथियार कंप्यूटर और इन्टरनेट होता है जिसके जरिये से लोग अपराध करते है |इसके अंतर्गत किसी के कंप्यूटर से जानकरी चुरा लेना ,या डिलीट कर देना ,किसी की जानकरी को चुरा कर उसका गलत इस्तमाल करना जैसे अपराध शामिल होते है | ये अपराध कई प्रकार से किये जाते है जैसे स्पैम ईमेल भेज कर ,वायरस डाल कर ,हैकिंग से आदि |

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साइबर क्राइम  कितने प्रकार के होते है ?

1)   स्पैम ईमेल (spam e-mail) —— हमारे ईमेल account में अनेक प्रकार के ईमेल आते है जिसमें ऐसे  ईमेल भी होते है जो सिर्फ कंप्यूटर को न केवल नुकसान पहुचाते है।बल्कि यूजर  का समय भी बर्बाद करते है |

स्पैम उस प्रकार के ईमेल को कहते है जो बिना मांगे या बुलाये आता है, जिसमे प्राय: विज्ञापन भरे होते है |जब से ईमेल का विकास हुआ है स्पैम एक समस्या बनी रही है| अप्रैल 2008 के एक अध्ययन से पता चलता है कि हर रोज कम से कम 100 अरब स्पैम भेजी जाती है | स्पैम भेजने के लिए पते चैटरूम से, वेब साईट से या वायरस के प्रयोग से एकत्र किए जाते है|

2)   हैकिंग( HACKING) ——- किसी की भी निजी जानकारी को हैक करना जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड और फिर उसमे फेर बदल करना computer hacking कहलाता है | हैकिंग का मतलब है किसी कंप्यूटर, डिवाइस, इंफॉर्मेशन सिस्टम या नेटवर्क में अनधिकृत रूप से घुसपैठ करना और डेटा से छेड़छाड़ करना। जो लोग hacking करते है उनको hackers   कहते है |यह हैकिंग उस सिस्टम की फिजिकल एक्सेस के जरिए भी हो सकती है और रिमोट एक्सेस के जरिए भी। जरूरी नहीं कि ऐसी हैकिंग के नतीजे में उस सिस्टम को नुकसान पहुंचाया  ही जाए । अगर कोई नुकसान नहीं भी हुआ है, तो भी घुसपैठ करना साइबर क्राइम के तहत आता है, जिसके लिए सजा का प्रावधान है।

3)  वायरस फैलाना ( spreading computer virus) —– –  साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे हो सकते हैं, इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स आदि वायरस शामिल हैं, यह आपके कंप्‍यूटर को काफी हानि पहुचा सकते हैं।जब आप किसी ऐसी site को open करते है जैसे पोर्न साईट आदि जैसी UNREGISTERED  site हो  ,या कुछ download करते है तो आपके कंप्यूटर में वायरस आ जाते है |ये आपके कंप्यूटर में save डेटा  को डिलीट कर देते है या खराब कर देते है |वायरस आने पर कुछ ऐसे प्रोग्राम अपने आप run करने लग जाते है जो आप नही चाहते है |

4)  फिशिंग (phishing) ———  फ़िशिंग को आमतौर पर ईमेल स्पूफिंग द्वारा किया जाता है। सोशल साइट्स पर आपके password और id इसमे hack कर लिए जाते है |इसमे यूजर को आकर्षित ईमेल भेजा जाता है |जैसे आपके bank के नाम से कोई mail आपके पास आती है तो आप उस mail में दिए link को open करते है तो आप अपने bank की साईट पर पहुच जाते है पर असलियत में वो bank की साईट न होकर फ्रॉड साईट का link होता है |इस में यदि आप अपने account number , अपना password और अन्य जानकरी डाल देते है तो वो hack हो जाती है और सीधे hackers के पास चली जाती है |जिसका वो लोग गलत इस्तमाल कर के आपके account से पैसे निकाल सकते है |

 ई-मेल में शामिल किसी भी लिंक को क्लिक करने से पहले वह सेफ हैं या नहीं यह जरूर चेक कर ले|

5)  सॉफ्टवेयर पाइरेसी (software piracy) ——  सॉफ्टवेयर की नकली copy तैयार कर सस्‍ते दामों में बेचना भी साइबर क्राइम के अन्‍तर्गत आता है, इससे साफ्टवेयर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है साथ ही साथ आपके कीमती उपकरण भी ठीक से काम नहीं करते हैं।

6) साइबर बुलिंग (Cyber-bullying) ——-  Cyber-bullying का हिंदी में मतलब होता है साइबर-धमकीं यानी Internet के माध्यम से गलत फोटो, गलत भाषा या Fake News आदि का इस्तेमाल करते हुए किसी भी व्यक्ति को डराना, धमकाना, उसे टॉर्चर करना या उसे गलत दिशा में भटकाना ये सब इसके अंतर्गत आता है|

यह एक अपराध है, जिसके लिए कानून में सजा का भी प्रावधान है| इस Cyber-bullying की चपेट में ज्यादातर बच्चे आते है, जिससे उनके जिन्दगी पर एक बहुत ही बुरा असर पड़ता है|इसमें किसी बच्चे को गन्दी फोटो, भाषा या किसी गेम के जरिए डराकर, धमाका या बहलाकर गलत काम करवाए जाते है| इससे बच्चो के दिमाग पर बहुत ही ज्यादा Negative असर पड़ता है और वे इस चीज से इतने डरे हुए होते है की उन्हें समझ नहीं आता की वे क्या करे| जिसके कारण वे अपने Parents को भी ये बात नहीं बता पाते है, और जाने-अनजाने इस रस्ते पर चलने लगते है, जिसके कारण आगे चलकर उनके दिमाग पर इतना बुरा प्रभाव डाला जाता है, की कई बार वे अपनी जान दे देते है|

इसका उदहारण आपने कुछ ही समय पहले देखा होगा, की किस प्रकार एक Blue Whale नाम के गेम ने किस तरह से कई बच्चो को अपने जाल में फसाया और आखिर में जाकर उनकी जान ले ली|

7) फर्जी बैंक कॉल (fraud bank call ) —— -आपको जाली ईमेल, मैसेज या फोन कॉल प्राप्‍त हो जो आपकी बैंक से  आई लगे जिसमें आपसे पूछा जाये कि आपके एटीएम नंबर और पासवर्ड की आवश्यकता है और यदि आपके द्वारा यह जानकारी नहीं दी गयी तो आपका  खाता बन्‍द कर दिया जायेगा या इस लिंक पर सूचना दें। याद रखें किसी भी बैंक द्वारा ऐसी जानकारी कभी भी इस तरह से नहीं मॉगी जाती है और भूलकर भी अपनी किसी भी इस प्रकार की जानकारी को इन्‍टरनेट या फोनकॉल या मैसेज के माध्‍यम से नहीं बताये।

8) सोशल नेटवर्किग साइटों पर अफवाह फैलाना (Spreading rumors on social networking sites) ——-– बहुत से लोग सोशल नेटवर्किग साइटों पर सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम करते हैं, लेकिन यूजर्स उनके इरादें समझ नहीं पाते हैं और जाने-अनजाने में ऐसे लिंक्‍स को शेयर करते रहते हैं, लेकिन यह भी साइबर अपराध और साइबर-आतंकवाद की श्रेणी में आता है।

9) लॉजिक बम (logic bomb) —— एक लॉजिक बम, जिसे “slag code” भी कहा जाता है, जिसे एक खास इवेंट के लिए तयार किया जाता है |

यह वायरस नहीं है, फिर भी यह आमतौर वायरस के जैसे ही व्यवहार करता है। यह किसी प्रोग्राम में चुपके से डाला जाता है और यह तब तक निष्क्रिय रहाता हैं, जब तक विशिष्ट कंडीशन नहीं आ जाती। विशिष्‍ट कंडीशन में वे एक्टिवेट हो जाते हैं।

उदाहरण के लिए, कुख्यात “Friday the 13th” वायरस यह जिस  महिने की 13 तारीख को शुक्रवार आता था उसी दिन हमला करता था और सिस्‍टम को स्‍लो कर देता था।

10) स्मुर्फ़ हमला ( smurf attack ) —–-यह हमला पीड़ित नेटवर्क पर बड़ी मात्रा में यातायात उत्पन्न करता है, जिससे नेटवर्क क्रैश हो जाता है। Smurf अटैक एक प्रकार का डॉस हमला है।

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साइबर क्राइम  का व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

किसी company या bank के data को चुरा लेने से न केवल वितीय (आर्थिक) नुकसान हो सकता है बल्कि साथ ही उस company या bank के प्रति कस्टमर का विश्वास भी समाप्त हो जाता है |

संवेदनशील ग्राहक डेटा के नुकसान के परिणामस्वरूप उन कंपनियों के लिए दंड और जुर्माना हो सकता है जो अपने ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा में विफल रहे हैं। डेटा उल्लंघन पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है।

भारत जैसे देश में cashless अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए  साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है |

साइबर क्राइम से बचने के लिए क्या कर सकते है ?

इस से बचने के लिए आप निम्नलिखित सावधानियां  रख सकते है—

  1. आपके mail account पर आई सभी  mails को open न करे केवल जो काम की mails हो उनको ही open करे |
  2. अपने कंप्यूटर पर एक अच्छा सा antivirus डाल के रखे  |
  3. जब भी कोई साईट open करे तो यह जांच ले की वो साईट सही हो |केवल रजिस्टर्ड साईट ही open करे |
  4. movie ,song या कोई भी चीज़ डाउनलोड करते वक्त ध्यान रखे हमेशा अच्छी साईट से ही download करे |
  5. किसी बोकस link को कभी open न करे |
  6.  आगे आपके बच्चे इन्टरनेट चलाते है तो उन पर नजर रखे की वो कौन सी साईट open करते है ,क्या करते है |
  7. सोशल साइट्स पर केवल अच्छे संदेशो को ही forward करे |
  8. गलत फ़ोन कॉल्स  के अनुसार कभी भी bank detail लीक न करे |
  9. अपने password or id किसी को न बताए |
  10. समय -समय अपने password बदलते रहे |

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साइबर क्राइम  से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा क्या प्रयास किये गए है ?
  • भारत में सुचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 पारित किया गया जिसके प्रावधानों के साथ साथ भारतीय दंड सहिंता के प्रावधान शामिल रूप से साइबर अपराधो से निपटने के लिए काफी है | इसके अंतर्गत 2 साल से लेकर उम्रकेद तथा दंड या फिर जुर्माने का प्रवधान है |
  • सरकार द्वारा “ राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति ,2013 ” जारी की गई जिसके अनुसार सरकार ने अति संवेदनशील सूचनाओ की सुरक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय अति संवेदनशील सुचना अवसंरचना केंद्र (National Critical Information Infrastructure Protection Centre- NCIIPC ) गठन किया है |
  • सरकार द्वारा ‘computer imergency response team (CERT-In) की स्थापना की गई जो कंप्यूटर सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की मोडल agency है |
  • विभिन्न स्तरों पर सुचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करने के उदेश्य से सरकार ने‘सुचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता’ (Information Security Education and Awareness : ISEA) परियोजना शुरू की |
  • भारत साइबर अपराध से सुरक्षा से सम्बन्धित सर्वोतम कार्य प्रणाली के लिए अमेरिका ,ब्रिटेन ,चीन जैसे देशो के साथ समन्वय कर रहा है |
  • अंतर agency समन्वय के लिए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ‘ (Indian cyber Crime Co-ordination Centre) स्थापना की गई है |
साइबर अपराध के लिए बनाए गए कुछ कानून इस प्रकार है —
  • हैकिंगः धाराएं और सजा —–
    आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (ए), धारा 66 – आईपीसी की धारा 379 और 406 के तहत अपराध साबित होने पर तीन साल तक की जेल या पांच लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.
  • जानकारी या डेटा चोरी—-
    ऐसे मामलों में आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 43 (बी), धारा 66 (ई), 67 (सी), आईपीसी की धारा 379, 405, 420 और कॉपीराइट कानून के तहत दोष साबित होने पर अपराध की गंभीरता के हिसाब से तीन साल तक की जेल या दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.
  • वायरस, स्पाईवेयर फैलाना —–
    इस तरह के केस में आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (सी), धारा 66, आईपीसी की धारा 268 और देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरस पर साइबर आतंकवाद से जुड़ी धारा 66 (एफ) भी लगाई जाती है. दोष सिद्ध होने पर साइबर-वॉर औरसाइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद का प्रावधान है. जबकि अन्य मामलों में तीन साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.
  • पहचान की चोरी ——
    किसी दूसरे शख्स की पहचान से जुड़े डेटा, गुप्त सूचनाओं वगैरह का इस्तेमाल करना भी साइबर अपराध है. यदि कोई इंसान दूसरों के क्रेडिट कार्ड नंबर, पासपोर्ट नंबर, आधार नंबर, डिजिटल आईडी कार्ड, ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन पासवर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर वगैरह का इस्तेमाल करके शॉपिंग या धन की निकासी करता है तो वह इस अपराध में शामिल हो जाता है. जब आप किसी दूसरे शख्स के नाम पर या उसकी पहचान का आभास देते हुए कोई जुर्म करते हैं, या उसका नाजायज फायदा उठाते हैं, तो यह जुर्म आइडेंटिटी थेफ्ट के दायरे में आता है. ऐसा करने वाले पर आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43, 66 (सी), आईपीसी की धारा 419 लगाए जाने का प्रावधान है. जिसमे दोष साबित होने पर तीन साल तक की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.
  • ई-मेल स्पूफिंग और फ्रॉड —–
    इस तरह के मामलों में आईटी कानून 2000 की धारा 77 बी, आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 66 डी, आईपीसी की धारा 417, 419, 420 और 465 लगाए जाने का प्रावधान है| दोष साबित होने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.
  • पोर्नोग्राफी —–
    इंटरनेट के माध्यम से अश्लीलता का व्यापार भी खूब फलफूल रहा है. ऐसे में पोर्नोग्राफी एक बड़ा कारोबार बन गई है. जिसके दायरे में ऐसे फोटो, विडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और सामग्री आती है, जो यौन, यौन कृत्यों और नग्नता पर आधारित हो. ऐसी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिए प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है. दूसरों के नग्न या अश्लील वीडियो तैयार करने वाले या ऐसा एमएमएस बनाने वाले या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से इन्हे दूसरों तक पहुंचाने वाले और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजने वाले लोग इसी कानून के दायरे में आते हैं. पोर्नोग्राफी प्रकाशित करना और इलेक्ट्रॉनिक जरियों से दूसरों तक पहुंचाना अवैध है, लेकिन उसे देखना, पढ़ना या सुनना अवैध नहीं माना जाता. जबकि चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी अवैध माना जाता है. इसके तहत आने वाले मामलों में आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 67 (ए), आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 के तहत सजा का प्रावधान है. जुर्म की गंभीरता के लिहाज से पहली गलती पर पांच साल तक की जेल या दस लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है लेकिन दूसरी बार गलती करने पर जेल की सजा सात साल तक बढ़ सकती है.

 

  • बच्चों और महिलाओं को तंग करना ——–
    आज के दौर में सोशल नेटवर्किंग साइट्स खूब चलन में हैं. ऐसे में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों, ई-मेल, चैट वगैरह के जरिए बच्चों या महिलाओं को तंग करने के मामले अक्सर सामने आते हैं. इन आधुनिक तरीकों से किसी को अश्लील या धमकाने वाले संदेश भेजना या किसी भी रूप में परेशान करना साइबर अपराध के दायरे में ही आता है. किसी के खिलाफ दुर्भावना से अफवाहें फैलाना, नफरत फैलाना या बदनाम करना भी इसी श्रेणी का अपराध है. इस तरह के केस में आईटी (संशोधन) कानून 2009 की धारा 66 (ए) के तहत सजा का प्रावधान है.दोष साबित होने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

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Final words —-

आज आपने what is cybercrime in hindi  में जाना की साइबर अपराध क्या है | इसके लिए क्या कानून है ? इन्टरनेट पर काम करते वक्त हमेशा सतर्क रहे | अपने password ,id को किसी को भी न बताए | उम्मीद है आज की जानकारी आपको पसंद आई होगी | कोई प्रश हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के पूछ सकते है |

 

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