मेक इन इंडिया(make in india ) क्या है ?योजना के उदेश्य ,लाभ और नुकसान

मेक इन इंडिया हिंदी ,मेक इन इंडिया क्या है ?योजना के उदेश्य ,लाभ और नुकसान,मेक इन इंडिया  ,मेक इन इंडिया ,make in india hindi ,make in india , What is the make in India? Objective, benefits and disadvantages of the scheme       प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ने जब 2014 में भारत के प्रधानमंत्री पद को सम्हाला था तो उसी साल उन्होंने 15 अगस्त पर अपने दिए भाषण में मेक इन इंडिया  (make in india ) का आईडिया  लोगो के सामने रखा और  एक महीने बाद ही मोदी जी ने कैबिनेट की मीटिंग की और  योजना को  पूरी दुनिया के सामने ले आये |इस योजना का लक्ष्य सभी वस्तुओ का भारत में निर्माण करना है |अपनी धुन के पक्के मोदी जी देश के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहते है | उनकी  सोच एक दम नई है उनकी हर बात में नयापन और देश के बेहतर विकास के लिए उर्जा साफ साफ़ नजर आती है |मेक इन इंडिया योजना के लागु होते ही बहुत से देशो ने भारत में  अपनी कंपनी खोलने के लिए निवेश किया है |जिस में अमेरिका ,चीन जैसे देश भी शामिल है |

मेक इन इंडिया  क्या है ?(what is make in india ?)——

makeinindia

जैसा की नाम से जाहिर है make in india यानी “भारत में बनाओ “|इस योजना को भारत सरकार  द्वारा देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही वस्तुओं के निर्माण पर जोर  देने के लिए बनाया गया है। इस से भारत में पूंजी और प्रौद्योगिकी निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद है|इस योजना का प्रमुख उद्देश्य रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के 25 क्षेत्रों में कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना हैं|

मेक इन इंडिया’ के लिए लोगोसंयुक्त राज्य अमेरिका के पोर्टलैंड, ओरेगन में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय डिजाइन एजेंसी द्वारा बनाया गया है।टाइम्स ऑफ इंडिया में एक रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञापन एजेंसी की भारतीय शाखा ने लोगो तैयार किया है। इसके भारतीय कार्यालय दक्षिण दिल्ली में साकेत में हैं।मेक इन इंडिया अभियान का ‘लोगो’ एक खूबसूरत शेर है जो अशोक चक्र से प्रेरित है और भारत की हर क्षेत्र में सफलता दर्शाता है

makeinindialogo

वर्षों से नीति-निमार्ता इस विषय पर चर्चा करते रहे हैं कि भारत में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को कैसे तीव्र करते हुए भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने यह काम कर दिखाया और कुछ ही महीनों में  ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को शुरू  किया जिसका उदेश्य उच्च  श्रेणी का मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्मित करना  है |

‘मेक इन इंडिया’ के तहत मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवा कार्यकलापों में 25 क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं और इंटरेक्टिव वेब-पोर्टल तथा पेशेवर तरीके से तैयार ब्रोशरों के जरिए विस्तृत जानकारी साझा की जा रही है और रक्षा उत्पादन, निर्माण और रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में, भारी पैमाने पर एफडीआई (FDI)को खोल दिया गया है।

पुरानी  प्र णाली  की  जगह पारदर्शी और उपयोगी  प्रणालियां लाई गई हैं। जिस से निवेश को बढ़ाने,  कौशल विकसित करने, बौद्धिक संपदा को बचाने तथा सबसे अच्छे दर्जे का मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिल रही है।  मुख्य क्षेत्रों – जिनमें रेलवे, रक्षा, बीमा और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं – को आश्चर्यजनक रूप से उच्च स्तर पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए खोला जा रहा है |

नये आईटी-प्रेरित अनुप्रयोग और ट्रैकिंग प्रक्रियाएं अब फाइलों और लालफीताशाही की जगह ले रही हैं। राज्य सरकार के स्तर पर लाइसेंसिंग नियमों को दुरुस्त करने व युक्तिसंगत बनाने के लिए,अनेक नई पहलें शुरू की गई हैं।
श्रम कानूनों में संशोधन से लेकर ऑनलाइन रिटर्न भरने , औद्योगिक लाइसेंसों की वैधता बढ़ाने आदि , “मेक इन इंडिया” को सफल  बनाने के लिए अनेक बदलाव किए जा चुके हैं।

 

मेक इन इंडिया योजना एक नजर में ——

makeinindiasummary

 

मेक इन इंडिया की शुरुवात कब हुई ? ( When did make in India start?)—–

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुवात दिल्ली के  विज्ञान भवन  में 25 सितंबर, 2014 को शुरू की |

29 दिसंबर 2014, को  औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया था जिस में  मोदी, उनके मंत्रिमंडल के मंत्री  और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ ही विभिन्न उद्योग के नेताओं ने भाग लिया था ।

मेक इन इंडिया  का उदेश्य क्या है ? (What is the purpose of make in India?)—–

1) विनिर्माण क्षेत्र में 12%-14% प्रतिवर्ष वृद्धि करना |

2) GDP में 2022 तक विनिर्माण की हिस्सेदारी 16%-25% करना |

3) विदेशी कंपनीज को ज्यादा से ज्यादा भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित करना |

4) सभी वस्तुओ का निर्माण 2022 तक भारत में शुरू करना |

5) सभी वस्तुओ का निर्माण भारत में होने से वस्तुओ की कीमत में कमी लाना |

6) विदेशी कंपनीज के भारत में निवेश करने से रोजगारो का सृजन करना |

7) जब सभी वस्तुए यही बनेगी तो आयात कम होगा जिस से देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा |

8)नवाचारों को बढ़ावा देना और उद्यमी क्षमता को प्रोत्साहित करना |

 मेक इन इंडिया के 25 क्षेत्र कौन कौन से है ? (What are the 25 areas of Make in India?)—-

मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए सरकार ने प्राथमिकता वाले 25 क्षेत्र चिन्हित किये हैं जिन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और संभावना सबसे अधिक है और भारत सरकार द्वारा भी निवेश को बढ़ाया जाएगा।

  1. गाडियां
  2. ऑटोमोबाइल अवयव
  3. विमानन
  4. जैव प्रौद्योगिकी
  5. रसायन
  6. निर्माण
  7. रक्षा विनिर्माण
  8. इलेक्ट्रिकल मशीनरी
  9. इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ
  10. खाद्य प्रसंस्करण
  11. सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस प्रबंधन
  12. चमड़ा
  13. मीडिया और मनोरंजन
  14. खनिज
  15. तेल और गैस
  16. फार्मास्यूटिकल्स
  17. बंदरगाह और शिपिंग
  18. रेलवे
  19. नवीकरणीय ऊर्जा
  20. सड़क और राजमार्ग
  21. अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान
  22. कपड़ा और परिधानों
  23. तापीय उर्जा
  24. पर्यटन और आतिथ्य
  25. कल्याण

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

 अभियान के शुरू होने के बाद विभिन्न देशो की क्या प्रतिक्रियाएं मिली है ?—

1). जनवरी 2015 में, स्पाइस समूह ने ₹ 5 अरब (अमेरिका $ 74 मिलियन) के निवेश के साथ उत्तर प्रदेश में एक मोबाइल फोन विनिर्माण इकाई शुरू करने के  लिए  स्पाइस समूह और उत्तर प्रदेश की सरकार के बीच समझोता हुआ ।

2)जनवरी 2015 में,  सैमसंग दक्षिण एशिया के सीईओ, भारत के , सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री (एमएसएमई) कलराज मिश्र, के साथ मुलाकात की  जिसके तहत 10 “एमएसएमई-सैमसंग तकनीकी स्कूल” भारत  में स्थापित किया जाएगा।  और  नोएडा में अपने संयंत्र में सैमसंग Z1 का निर्माण होगा।

3)फरवरी 2015 में, हुआवेई बेंगलुरु में एक नए अनुसंधान और विकास (R&D) परिसर  खोला गया।जिस में  अमेरिका ने  $ 170 मिलियन का निवेश किया था|

4)फरवरी 2015 में, Xiaomi ने smartphones शुरू करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ प्रारंभिक वार्ता शुरू की ।

5)जून 2015, फ्रांस स्थित LH विमानन  कंपनी ने  भारत में  ड्रोन के निर्माण के लिए स्थापित करने के लिए OIS उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

6).8 अगस्त को 2015, फॉक्सकॉन कंपनी ने  घोषणा की कि वह महाराष्ट्र में उच्च तकनीक अर्धचालक(semi-conductor) विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए  पांच साल में $ 5 अरब डॉलर  से अधिक का निवेश करेगी |

7).18 अगस्त 2015, चेन्नई के निकट श्रीपेरंबुदूर में   लेनोवो और मोटोरोला ने अपना संयंत्र शुरू किया |

8).माइक्रोमैक्स ने घोषणा की कि वह ₹ 3 अरब (अमेरिका $ 45 मिलियन) की लागत से राजस्थान, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में तीन नए विनिर्माण इकाइयोंको शुरू करेगा |

इसके अतिरिक्त सभी क्षेत्रो — गाडियां,ऑटोमोबाइल अवयव,विमानन,जैव प्रौद्योगिकी,रसायननिर्माण,रक्षा विनिर्माण,इलेक्ट्रिकल मशीनरी,इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ,खाद्य प्रसंस्करण,सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस प्रबंधन,चमड़ा,मीडिया और मनोरंजन,खनिज,तेल और गैस,फार्मास्यूटिकल्स,बंदरगाह और शिपिंग,रेलवे,नवीकरणीय ऊर्जा,सड़क और राजमार्ग,अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान,कपड़ा और परिधानों,तापीय उर्जा,पर्यटन और आतिथ्य,कल्याण दुनिया के बहुत से देशो ने भरी निवेश का प्रस्ताव भारत सरकार के सामने रखा है |

किसान विकास पत्र (kvp) क्या है ?इसकी ब्याज दर क्या है ?

आयुष्मान भारत योजना क्या है?

 मेक इन इंडिया योजना के लाभ क्या है ? (What is the benefit of Make in India Scheme?)——

1 )नौकरी के अवसर का विकास —-
मेक इन इंडिया के  मुख्य  उद्देश्यों में से एक भारत के  नागरिकों के लिए नौकरी के अवसर प्रदान करना है। इसने देश की युवा पीढ़ी को अपने प्रमुख लाभार्थी के रूप में लक्षित किया है। लक्षित 25 क्षेत्रों में निवेश, यानी दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन इत्यादि युवा उद्यमियों को  अभिनव विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

2). ब्रांड वैल्यू में वृद्धि—-
अधिकांश शहरी आबादी भारतीय खुदरा विक्रेताओं में अपना विश्वास रखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय ब्रांड पसंद करती है। नतीजतन, छोटी विनिर्माण कंपनियों को बाजार में अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ता है।मेक इन इंडिया अभियान के कारण, ऐसे छोटे निर्माताओ में निवेश करने वाली कंपनियां से  भारतीय व्यापार का ब्रांड मूल्य  बढ़ेगा।

3). सकल घरेलू उत्पाद का विस्तार —–
भारत में उत्पादों के निर्माण के लिए , आर्थिक विकास अनिवार्य है, जो न केवल व्यापार क्षेत्र को बढ़ावा देगा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद को भी बढ़ाएगा क्योंकि नई फैक्ट्रियों की स्थापना और भारतीय वाणिज्यिक क्षेत्रों में अनुमानित विभिन्न निवेशों की स्थापना के साथ ही आय का प्रवाह भारी होगा। निर्यात, वास्तुकला, कपड़ा, दूरसंचार इत्यादि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के अनिवार्य रूप से बढ़ने की संभावना है,जो  भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगे जो पहले से ही दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है।

4). रुपये को मजबूत करना
विनिर्माण उद्योगों का उदय भारत को विभिन्न वाणिज्यिक उत्पादों के निर्माण के लिए स्वचालित रूप से एक केंद्र में परिवर्तित कर देगा; नतीजतन, एफडीआई का एक बड़ा संग्रह होगा, जो बदले में अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के खिलाफ रुपये को मजबूत करेगा।

5). प्रौद्योगिकी का उन्नयन (upgradation)—
भारत एक  विकासशील देश है, जिसमें स्पष्ट रूप से विभिन्न नवीनतम मशीनीकरण की कमी है, जो देश के विकास के रास्ते में एक बड़ी बाधा है। इसलिए,  मेक इन इंडिया के द्वारा भारत मेंआने वाले असंख्य देशों के साथ, भारत को इन देशों के साथ आने वाली नवीनतम तकनीक का उपयोग करने का मौका दिया जाएगा।   इस से  न केवल भारत को प्रौद्योगिकी के ज्ञान और उपयोग से फायदा होगा बल्कि संबंधित राष्ट्रों को एक कुशल और अयोग्य श्रम प्रदान किया जाएगा।

6.) पूंजी का प्रवाह—-
पूंजीकरण की शुरुआत के बाद से, भारतीय मुद्रा विदेशी देशों पर खर्च की जा रही है।मेक इन इंडिया से भारत में ही वस्तुओ के निर्माण और विदेशी कंपनीज के निवेश करने से भारत विदेशी देशों पर खर्च नहीं करेगा, लेकिन विदेशी देश निवेश और मजदूरी के रूप में भारत में खर्च करेंगे।

7).व्यापार की आसानी—-
भारत में अपने उत्पादों का निर्माण करने के लिए पूरी दुनिया को दिए गए खुले निमंत्रण के साथ, उद्यमियों पर  विभिन्न प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे और पूरी दुनिया से इच्छुक व्यवसायियों को भारत में निवेश पर कोई तनाव नहीं होगा ।

8). युवा दिमाग की उपलब्धता—-
भारत की अधिकांश युवा पीढ़ी बेहतर भविष्य की आशा में देश से बाहर निकलने की योजना बना रही है। युवा श्रम की कमी के कारण, भारत हमेशा अभिनव और नए विचारों से वंचित रहा है। मेक इन इंडिया अभियान के साथ, युवा को रोजगार मिलेगा बल्कि उनके युवा और ताजा दिमाग भी औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

 मेक इन इंडिया योजना से  नुकसान क्या है ?( What is the disadvantages of the Make in India plan?)—–

1)कृषि की उपेक्षा—-
मेक इन इंडिया अभियान का सबसे नकारात्मक प्रभाव भारत के कृषि क्षेत्र में होगा। यह एक प्रसिद्ध तथ्य है कि भारतीय क्षेत्र में 61% खेती योग्य भूमि है। औद्योगिक क्षेत्रों की शुरूआत के साथ, भारत में कृषि को कुछ हद तक उपेक्षित किया जाएगा।

2). प्राकृतिक संसाधनों का विलोपन—
चूंकि मेक इन इंडिया मुख्य रूप से विनिर्माण उद्योगों पर आधारित है, इसलिए यह विभिन्न कारखानों के सेट-अप की मांग करता है। आम तौर पर, ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, भूमि इत्यादि का उपभोग करती हैं। जिस से इनका विलोपन होगा |

3). छोटे उद्यमियों के लिए नुकसान—-
मेक इन इंडिया अभियान  भारत में निर्माण के लिए विदेशी देशों का स्वागत करता है, यह अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक कंपनियों का ध्यान आमंत्रित करते हुए विदेशी देशों के साथ व्यापार पर विभिन्न प्रतिबंधों को आसान  बनाता है। हालांकि, ये कंपनियां  स्थानीय उद्यमियों पर हावी रहेंगी और उन्हें व्यवसाय से बाहर कर देंगी।

4). विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था—
भारतीय अर्थव्यवस्था  तीन क्षेत्रों अर्थात कृषि, उद्योग और सेवाओं का गठन करता है।  भारतीय अर्थव्यवस्था सेवा क्षेत्र में सब से बड़ी है, जिसने जीडीपी का 57% योगदान दिया है। लेकिन मेक इन इंडिया अभियान में  अर्थव्यवस्था के विनिर्माण और निर्यात पर जोर दिया गया जिस से  अन्य  आर्थिक क्षेत्रों के लिए एक बड़ा नुकसान होगा और भारत में मेक इन की प्रगति को स्वचालित रूप से कम कर देगा।

5). प्रदूषण—-
भारत में प्रचलित सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 76.50 की प्रदूषण सूचकांक है। भारत आंदोलन में बदलाव के साथ, यह प्रदूषण स्तर कुछ वर्षों में पैदा होने की संभावना है। आखिरकार, भारत में हालत खराब हो गई। इसलिए, भारत में मेक इन इंडिया आर्थिक रूप से सही हो सकता है लेकिन  इसका पारिस्थितिक रूप से विपरीत प्रभाव होगा।

अधिक जाने के लिए मेक इन इंडिया की साईट पर देख सकते है http://www.makeinindia.com/about

निष्कर्ष —-  

मेक इन इंडिया हिंदी ,मेक इन इंडिया क्या है ?योजना के उदेश्य ,लाभ और नुकसान,मेक इन इंडिया  ,मेक इन इंडिया ,make in india in hindi ,make in india , What is the make in India? Objective, benefits and disadvantages of the scheme|मेक इन इंडिया योजना (make in india ) मोदी सरकार द्वारा चलाई गई एक बहुत ही महत्वकांक्षी योजना है |अगर ये योजना सफल रहती है तो वो दिन दूर नही होंगे जब भारत को आयात करने की जरूरत नही होगी |देश खुद सक्षम होगा सभी वस्तुओ के निर्माण करने में |देश की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास करेगी |अब देखना ये है की क्या ऐसा सच में हो पाता है ?इसे भविष्य पर छोड़ते है ?आपको इस योजना से सम्बन्धित कोई सवाल पूछना हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के पूछ सकते है |

Net banking क्या है, कैसे होती है ?

राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) क्या है ? इसे कैसे खरीदे ?

Electoral Bond क्या है ? जाने हिंदी में

Bitcoin क्या है जाने पूरी जानकारी हिंदी में

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *